हिंदी व्याकरण
हिंदी व्याकरण हिंदी
भाषा को शुद्ध रूप से लिखने और बोलने संबंधी नियमों का बोध कराने वाला
शास्त्र है। यह हिंदी भाषा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें हिंदी
के सभी स्वरूपों को चार खंडों के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है। इसमें वर्ण
विचार के अंतर्गत वर्ण और ध्वनी पर विचार किया गया है तो शब्द विचार के अंतर्गत शब्द के विविध पक्षों से संबंधित नियमों पर विचार किया गया है। वाक्य विचार के अंतर्गत वाक्य संबंधी विभिन्न स्थितियों एवं छंद विचार में साहित्यिक रचनाओं के शिल्पगत पक्षों पर विचार किया गया है।
ग्यारह स्वर के वर्ण : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
हिन्दी भाषा में ऋ को आधा स्वर(अर्धस्वर) माना जाता है,अतः इसे स्वर में शामिल किया गया है।
हिन्दी भाषा में प्रायः ॠ और ऌ का प्रयोग नहीं होता।अं और अः को भी स्वर में नहीं गिना जाता।
इसलिये हम कह सकते हैं कि हिन्दी में 11 स्वर होते हैं।यदि ऍ, ऑ नाम की विदेशी ध्वनियों को शामिल करें तो हिन्दी में 11+2=13 स्वर होते हैं, फिर भी 11 स्वर हिन्दी में मूलभूत हैं.
वर्ण विचार
मुख्य लेख : वर्ण विभाग
वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का पहला खंड है जिसमें भाषा की मूल इकाई वर्ण
और ध्वनि पर विचार किया जाता है। इसके अंतर्गत हिंदी के मूल अक्षरों की
परिभाषा, भेद-उपभेद, उच्चारण संयोग, वर्णमाला, आदि नियमों का वर्णन होता
है।वर्ण
हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी वर्णमाला में कुल ५२ अक्षर हैं, जिनमें से १६ स्वर हैं और ३६ व्यंजन।
स्वर
हिन्दी भाषा में मूल रूप से ग्यारह स्वर होते हैं।ये ग्यारह स्वर निम्नलिखित हैं।ग्यारह स्वर के वर्ण : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
हिन्दी भाषा में ऋ को आधा स्वर(अर्धस्वर) माना जाता है,अतः इसे स्वर में शामिल किया गया है।
हिन्दी भाषा में प्रायः ॠ और ऌ का प्रयोग नहीं होता।अं और अः को भी स्वर में नहीं गिना जाता।
इसलिये हम कह सकते हैं कि हिन्दी में 11 स्वर होते हैं।यदि ऍ, ऑ नाम की विदेशी ध्वनियों को शामिल करें तो हिन्दी में 11+2=13 स्वर होते हैं, फिर भी 11 स्वर हिन्दी में मूलभूत हैं.
- अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ऍ ऑ (हिन्दी में ॠ ऌ का प्रयोग प्रायः नहीं होता तथा ऍ ऑ का प्रयोग विदेशी ध्वनियों को दर्शाने के लिए होता है।)
स्वर
हिन्दी भाषा में मूल रूप से ग्यारह स्वर होते हैं।ये ग्यारह स्वर निम्नलिखित हैं।ग्यारह स्वर के वर्ण : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
हिन्दी भाषा में ऋ को आधा स्वर(अर्धस्वर) माना जाता है,अतः इसे स्वर में शामिल किया गया है।
हिन्दी भाषा में प्रायः ॠ और ऌ का प्रयोग नहीं होता।अं और अः को भी स्वर में नहीं गिना जाता।
इसलिये हम कह सकते हैं कि हिन्दी में 11 स्वर होते हैं।यदि ऍ, ऑ नाम की विदेशी ध्वनियों को शामिल करें तो हिन्दी में 11+2=13 स्वर होते हैं, फिर भी 11 स्वर हिन्दी में मूलभूत हैं.
- अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ऍ ऑ (हिन्दी में ॠ ऌ का प्रयोग प्रायः नहीं होता तथा ऍ ऑ का प्रयोग विदेशी ध्वनियों को दर्शाने के लिए होता है।)
शब्द विचार
मुख्य लेख : शब्द और उसके भेद
शब्द विचार हिंदी व्याकरण का दूसरा खंड है जिसके अंतर्गत शब्द की
परिभाषा, भेद-उपभेद, संधि, विच्छेद, रूपांतरण, निर्माण आदि से संबंधित
नियमों पर विचार किया जाता है।शब्द
शब्द वर्णों या अक्षरों के सार्थक समूह को कहते हैं।- उदाहरण के लिए क, म तथा ल के मेल से 'कमल' बनता है जो एक खास किस्म के फूल का बोध कराता है। अतः 'कमल' एक शब्द है
- कमल की ही तरह 'लकम' भी इन्हीं तीन अक्षरों का समूह है किंतु यह किसी अर्थ का बोध नहीं कराता है। इसलिए यह शब्द नहीं है।
संज्ञा
मुख्य लेख : संज्ञा और उसके भेद
किसी भी नाम, जगह, व्यक्ति विशेष अथवा स्थान आदि बताने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं। उदाहरण -- राम, भारत, हिमालय, गंगा, मेज़, कुर्सी, बिस्तर, चादर, शेर, भालू, साँप, बिच्छू आदि।
सज्ञा के कुल ६ भेद बताये गए हैं-
१-व्यक्तिवाचक: जैसे राम, भारत, सूर्य आदि।
२-जातिवाचक: जैसे बकरी, पहाड़, कंप्यूटर आदि।
३-समूह वाचक: जैसे कक्षा, बारात, भीड़, झुंड आदि।
४-द्रव्य वाचक: जैसे पानी, लोहा, मिट्टी, खाद या उर्वरक आदि।
५-संख्या वाचक: जैसे दर्जन, जोड़ा, पांच, हज़ार आदि।
६-भाववाचक: जैसे ममता, बुढापा आदि।
सर्वनाम
मुख्य लेख : सर्वनाम और उसके भेद
संज्ञा के बदले में आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। उदाहरण -- मैं, तुम, आप, वह, वे आदि।
-
- सर्वनाम सार्थक शब्दों के आठ भेदों में एक भेद है।
- व्याकरण में सर्वनाम एक विकारी शब्द है।
सर्वनाम के छह प्रकार के भेद हैं-
- पुरुषवाचक (व्यक्तिवाचक) सर्वनाम।
- निश्चयवाचक सर्वनाम।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम।
- संबन्धवाचक सर्वनाम।
- प्रश्नवाचक सर्वनाम।
- निजवाचक सर्वनाम।
- उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला स्वयं के लिए करता है, उसे उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे - मैं, हम, मुझे, हमारा आदि।
- मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला श्रोता के लिए करे, उसे मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे - तुम, तुझे, तुम्हारा आदि।
- अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला श्रोता के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के लिए करे, उसे अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- वह, वे, उसने, यह, ये, इसने, आदि।
जो (शब्द) सर्वनाम किसी व्यक्ति, वस्तु आदि की ओर निश्चयपूर्वक संकेत करें वे निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- ‘यह’, ‘वह’, ‘वे’ सर्वनाम शब्द किसी विशेष व्यक्ति का निश्चयपूर्वक बोध करा रहे हैं, अतः ये निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।
उदाहरण-
-
- यह पुस्तक सोनी की है
- ये पुस्तकें रानी की हैं।
- वह सड़क पर कौन आ रहा है।
- वे सड़क पर कौन आ रहे हैं।
जिन सर्वनाम शब्दों के द्वारा किसी निश्चित व्यक्ति अथवा वस्तु का बोध न हो वे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- ‘कोई’ और ‘कुछ’ आदि सर्वनाम शब्द। इनसे किसी विशेष व्यक्ति अथवा वस्तु का निश्चय नहीं हो रहा है। अतः ऐसे शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।
उदाहरण-
-
- द्वार पर कोई खड़ा है।
- कुछ पत्र देख लिए गए हैं और कुछ देखने हैं।
परस्पर सबन्ध बतलाने के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग होता है उन्हें संबन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- ‘जो’, ‘वह’, ‘जिसकी’, ‘उसकी’, ‘जैसा’, ‘वैसा’ आदि।
उदाहरण-
-
- जो सोएगा, सो खोएगा; जो जागेगा, सो पावेगा।
- जैसी करनी, तैसी पार उतरनी।
जो सर्वनाम संज्ञा शब्दों के स्थान पर भी आते है और वाक्य को प्रश्नवाचक भी बनाते हैं, वे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- क्या, कौन आदि।
उदाहरण-
- तुम्हारे घर कौन आया है?
- दिल्ली से क्या मँगाना है?
जहाँ स्वयं के लिए ‘आप’, ‘अपना’ अथवा ‘अपने’, ‘आप’ शब्द का प्रयोग हो वहाँ निजवाचक सर्वनाम होता है। इनमें ‘अपना’ और ‘आप’ शब्द उत्तम, पुरुष मध्यम पुरुष और अन्य पुरुष के (स्वयं का) अपने आप का ज्ञान करा रहे शब्द हें जिन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।
विशेष-
जहाँ ‘आप’ शब्द का प्रयोग श्रोता के लिए हो वहाँ यह आदर-सूचक मध्यम पुरुष होता है और जहाँ ‘आप’ शब्द का प्रयोग अपने लिए हो वहाँ निजवाचक होता है।
उदाहरण-
- राम अपने दादा को समझाता है।
- श्यामा आप ही दिल्ली चली गई।
- राधा अपनी सहेली के घर गई है।
- सीता ने अपना मकान बेच दिया है।
- आप, वे, ये, हम, तुम शब्द बहुवचन के रूप में हैं, किन्तु आदर प्रकट करने के लिए इनका प्रयोग एक व्यक्ति के लिए भी किया जाता है।
- ‘आप’ शब्द स्वयं के अर्थ में भी प्रयुक्त हो जाता है। जैसे- मैं यह कार्य आप ही कर लूँगा।
विशेषण
मुख्य लेख : विशेषण और उसके भेद
संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। उदाहरण -- 'हिमालय एक विशाल पर्वत है।' यहाँ "विशाल" शब्द "हिमालय" की विशेषता बताता है इसलिए वह विशेषण है।
- संख्यावाचक विशेषण
- दस लड्डू चाहिए।
- परिमाणवाचक विशेषण
- एक किलो चीनी दीजिए।
- गुणवाचक विशेषण
- हिमालय एक विशाल पर्वत है
- सार्वनामिक विशेषण
- मेरी बहन हैं।
क्रिया
मुख्य लेख : क्रिया और उसके भेद
कार्य का बोध कराने वाले शब्द को क्रिया कहते हैं। उदाहरण -- आना, जाना, होना, पढ़ना, लिखना, रोना, हंसना, गाना आदि।
- मुख्य क्रिया के साथ आकर काम के होने या किए जाने का बोध कराने वाली क्रियाएं सहायक क्रियाएं कहलाती हैं। जैसे - है, था, गा, होंगे आदि शब्द सहायक क्रियाएँ हैं।
क्रिया विशेषण
मुख्य लेख : क्रिया विशेषण और उसके भेद
किसी भी क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहते हैं। उदाहरण -- 'मोहन मुरली की अपेक्षा कम पढ़ता है।' यहाँ "कम" शब्द "पढ़ने" (क्रिया) की विशेषता बताता है इसलिए वह क्रिया विशेषण है।
- 'मोहन बहुत तेज़ चलता है।' यहाँ "बहुत" शब्द "चलना" (क्रिया) की विशेषता बताता है इसलिए यह क्रिया विशेषण है।
- 'मोहन मुरली की अपेक्षा बहुत कम पढ़ता है।' यहाँ "बहुत" शब्द "कम" (क्रिया विशेषण) की विशेषता बताता है इसलिए वह क्रिया विशेषण है।
1. रीतिवाचक क्रिया विशेषण : मोहन ने अचानक कहा।
2. कालवाचक क्रिया विशेषण :' मोहन ने कल कहा था।
3. स्थानवाचक क्रिया विशेषण : मोहन यहाँ आया था।
4. परिमाणवाचक क्रिया विशेषण : मोहन कम बोलता है।
समुच्चय बोधक
मुख्य लेख : समुच्चय बोधक
दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चय बोधक कहते हैं। उदाहरण -- 'मोहन और सोहन एक ही शाला में पढ़ते हैं।' यहाँ "और" शब्द "मोहन" तथा "सोहन" को आपस में जोड़ता है इसलिए यह संयोजक है।
- 'मोहन या सोहन में से कोई एक ही कक्षा कप्तान बनेगा।' यहाँ "या" शब्द "मोहन" तथा "सोहन" को आपस में जोड़ता है इसलिए यह संयोजक है।
विस्मयादि बोधक
मुख्य लेख : विस्मयादि बोधक
विस्मय प्रकट करने वाले शब्द को विस्मायादिबोधक कहते हैं। उदाहरण -- अरे! मैं तो भूल ही गया था कि आज मेरा जन्म दिन है। यहाँ "अरे" शब्द से विस्मय का बोध होता है अतः यह विस्मयादिबोधक है।
पुरुष
| एकवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|
| उत्तम पुरुष | मैं | हम |
| मध्यम पुरुष | तुम | तुम लोग / तुम सब |
| अन्य पुरुष | यह | ये |
| वह | वे / वे लोग | |
| आप | आप लोग / आप सब |
- उत्तम पुरुष- मैं, हम
- मध्यम पुरुष - तुम, आप
- अन्य पुरुष- वह, राम आदि
मिसाल के तौर पर यदि ऐसा कहा जाए कि "हम सब भारतवासी हैं" , तो यहाँ हम बहुवचन है और अगर ऐसा लिखा जाए कि "हम विद्युत के कार्य में निपुण हैं" , तो यहाँ हम एकवचन के रुप में भी है और बहुवचन के रूप में भी है । हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है - इस वाक्य में देखें तो , "हम" एकवचन के रुप में प्रयुक्त हुआ है ।
वक्ता अपने आपको मान देने के लिए भी एकवचन के रूप में हम का प्रयोग करते हैं । लेखक भी कई बार अपने बारे में कहने के लिए हम शब्द का प्रयोग एकवचन के रुप में अपने लेख में करते हैं । इस प्रकार हम एक एकवचन के रुप में मानवाचक सर्वनाम भी है ।
वचन
हिन्दी में दो वचन होते हैं:- एकवचन- जैसे राम, मैं, काला, आदि एकवचन में हैं।
- बहुवचन- हम लोग, वे लोग, सारे प्राणी, पेड़ों आदि बहुवचन में हैं।
लिंग
हिन्दी में सिर्फ़ दो ही लिंग होते हैं: स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। कोई वस्तु या जानवर या वनस्पति या भाववाचक संज्ञा स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग, इसका ज्ञान अभ्यास से होता है। कभी-कभी संज्ञा के अन्त-स्वर से भी इसका पता चल जाता है।- पुल्लिंग- पुरुष जाति के लिए प्रयुक्त शब्द पुल्लिंग में कहे जाते हैं। जैसे - अजय, बैल, जाता है आदि
- स्त्रीलिंग- स्त्री जाति के बोधक शब्द जैसे- निर्मला, चींटी, पहाड़ी, खेलती है,काली बकरी दूध देती है आदि।
कारक
८ कारक होते हैं।- कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, संबन्ध, अधिकरण, संबोधन।
मुख्य लेख : संबन्ध बोधक
दो वस्तुओं के मध्य संबन्ध बताने वाले शब्द को संबन्धकारक कहते हैं। उदाहरण -- 'यह मोहन की पुस्तक है।' यहाँ "की" शब्द "मोहन" और "पुस्तक" में संबन्ध बताता है इसलिए यह संबन्धकारक है।
उपसर्ग
मुख्य लेख : उपसर्ग
वे शब्द जो किसी दूसरे शब्द के आरम्भ में लगाये जाते हैं। इनके लगाने से
शब्दों के अर्थ परिवर्तन या विशिष्टता आ सकती है। प्र+ मोद = प्रमोद, सु +
शील = सुशीलउपसर्ग प्रकृति से परतंत्र होते हैँ। उपसर्ग चार प्रकार के होते हैँ -
- 1) संस्कृत से आए हुए उपसर्ग,
- 2) कुछ अव्यय जो उपसर्गों की तरह प्रयुक्त होते है,
- 3) हिन्दी के अपने उपसर्ग (तद्भव),
- 4) विदेशी भाषा से आए हुए उपसर्ग।
प्रत्यय
मुख्य लेख : प्रत्यय
वे शब्द जो किसी शब्द के अन्त में जोड़े जाते हैं , उन्हें प्रत्यय (प्रति + अय = बाद में आने वाला) कहते हैं। जैसे- गाड़ी + वान = गाड़ीवान, अपना + पन = अपनापनसंधि
मुख्य लेख : संधि (व्याकरण)
दो शब्दों के पास-पास होने पर उनको जोड़ देने को सन्धि कहते हैं। जैसे-
सूर्य + उदय = सूर्योदय, अति + आवश्यक = अत्यावश्यक, संन्यासी = सम् +
न्यासीसमास
मुख्य लेख : समास
दो शब्द आपस में मिलकर एक समस्त पद की रचना करते हैं। जैसे-राज+पुत्र = राजपुत्र, छोटे+बड़े = छोटे-बड़े आदिसमास छ: होते हैं:
द्वन्द, द्विगु, तत्पुरुष, कर्मधारय, अव्ययीभाव और बहुब्रीहि ।
वाक्य विचार
वाक्य विचार हिंदी व्याकरण का तीसरा खंड है जिसमें वाक्य की परिभाषा, भेद-उपभेद, संरचना आदि से संबंधित नियमों पर विचार किया जाता है।वाक्य
मुख्य लेख : वाक्य और वाक्य के भेद
शब्दों के समूह को जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहते हैं। वाक्य के दो अनिवार्य तत्त्व होते हैं--
- उद्देश्य और
- विधेय
- १- अर्थ के आधार पर वाक्य भेद
- २- रचना के आधार पर वाक्य भेद
१-विधान वाचक वाक्य, २- निषेधवाचक वाक्य, ३- प्रश्नवाचक वाक्य, ४- विस्म्यादिवाचक वाक्य, ५- आज्ञावाचक वाक्य, ६- इच्छावाचक वाक्य, ७- संदेहवाचक वाक्य।
काल
मुख्य लेख : काल और काल के भेद
वाक्य तीन काल में से किसी एक में हो सकते हैं:- वर्तमान काल जैसे मैं खेलने जा रहा हूँ।
- भूतकाल जैसे 'जय हिन्द' का नारा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने दिया था और
- भविष्य काल जैसे अगले मंगलवार को मैं नानी के घर जाउँगा।
- वर्तमान काल के तीन भेद होते हैं- सामान्य वर्तमान काल, संदिग्ध वर्तमानकाल तथा अपूर्ण वर्तमान काल।
- भूतकाल के भी छे भेद होते हैं समान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत और हेतुमद भूत।
- भविष्य काल के दो भेद होते हैं- सामान्य भविष्यकाल और संभाव्य भविष्यकाल।
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